अब भी कहोगे क्या ? जय साईं राम

 आखिरकार सांईं ट्रस्ट ने माना की सांईं मुस्लिम फकीर थे, ट्रस्ट ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद से मांगी माफी... ✌️🚩


सांईं मामले में ज्योतिष एवं द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर करने वाले मुंबई-सांईंधाम चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख रमेश जोशी ने मीडिया के समक्ष माफी मांगी है। 

शनिवार को परमहंसी गंगा आश्रम पहुंचे रमेश जोशी ने सांईं से संबंधित विभिन्न साहित्य और साक्ष्यों-दस्तावेजों के आधार पर यह घोषणा भी की, कि सांईं मुस्लिम फकीर थे। 


इस दावे के बाद अब मंदिरों को सांई की मूर्ति रखने का कोई औचित्य नहीं है।‌ चुंकि जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती शुरू से ही साईं पूजा का विरोध करते चले आ रहे थे और हिंदू देवी देवताओं के मध्य साईं की प्रतिमा रखने के खिलाफ थे।‌ ऐसे में सनातन धर्मावलंबियों को मंदिरों में सांई

की प्रतिमा को बाहर कर पूजा से परहेज करना चाहिए। क्योंकि हमारे महान देवताओं भगवानों के मध्य एक मांसाहारी मुस्लिम फकीर का कोई कार्य नही...

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के अनुसार अब भी  साई की प्रतिमा को आप घर में रख रहे है तो आप से बडा सनातन धर्म का द्रोही कोई नही है वैसे हमें पीरों फकीरों मजारों पर माथा फोड़ने की आदत है लगता नहीं की जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के इस संघर्ष से हमें कोई सीख मिलेगी ।


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