माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर जी की जन्म जयंती पर शत शत नमन

 !!प्राध्यापक के रूप में श्री गुरु जी!!

  (जन्म जयंती पर शत् शत् नमन)


 माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक का जन्म 19फरवरी 1906 को हुआ था। वे एक महान विचारक थे।  गोलवलकर जी जब बनारस से नागपुर आये तो वहां आकर भी उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहा। इसके साथ ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी अत्यन्त खराब हो गयी थी। इसी बीच बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से उन्हें निर्देशक पद पर सेवा करने का प्रस्ताव मिला। 16 अगस्त सन् 1931 को श्री गुरूजी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राणि-शास्त्र विभाग में निर्देशक का पद संभाल लिया। चूँकि यह अस्थायी नियुक्ति थी। इस कारण वे प्राय: चिन्तित भी रहतेथे अपने विद्यार्थी जीवन में भी माधव राव अपने मित्रों के अध्ययन में उनका मार्गदर्शन किया करते थे। और अब तो अध्यापन उनकी आजीविका का साधन ही बन गया था। उनके अध्यापन का विषय यद्यपि प्राणि-विज्ञान था,किन्तु विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी प्रतिभा शक्ति को देखकर उन्हें बी.ए. की कक्षा के छात्रों को अंग्रेजी और राजनीति शास्त्र पढ़ाने का भी अवसर दिया। अध्यापक के नाते माधव राव अपनी विलक्षण प्रतिभा और योग्यता से छात्रों में इतने अधिक अत्यन्त लोकप्रिय हो गये कि उनके छात्र उनको गुरुजी के नाम से सम्बोधित करने लगे। इसी नाम से वे आगे चलकर जीवन भर जाने गये। माधव राव यद्यपि विज्ञान के परास्नातक थे, फिर भी आवश्यकता पड़ने पर अपने छात्रों तथा मित्रों को अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, गणित तथा दर्शन जैसे अन्य विषय भी पढ़ाने को सदैव तत्पर रहते थे। यदि उन्हें पुस्तकालय में पुस्तकें नहीं मिलती थीं, तो वे उन्हें खरीद कर और पढ़कर जिज्ञासू छात्रों एवं मित्रों की सहायता करते रहते थे। वे अपने वेतन का अधिकांश अंश अपने होनहार छात्र-मित्रों की फीस भर देने अथवा उनकी पुस्तकें खरीद देने में ही व्यय कर देते थे।  116 वीं जयन्ती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरु जी को शत शत नमन 


(कमल किशोर डुकलान रूडकी )


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