देव संस्कृति विश्वविद्यालय में प्रारंभ हुआ योग समिट



 देसंविवि में अंतर्राष्ट्रीय योग समिट-23 का शुभारंभ

एक दूसरे के सकारात्मक कार्यों में करें सहयोग ः डॉ प्रणव पण्ड्या

वर्तमान समय में सनातन योग की आवश्यकता ः स्वामी चिदानंद सरस्वती

योग ही मन को शांत रखता है ः पद्मश्री डॉ नागेन्द्र

धन्वन्तरी सहित कई पत्रिकाओं का विमोचन

हरिद्वार 17 नवंबर। हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय योग समिट-२३ का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की शुरुआत स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, पद्मश्री डॉ एच. आर. नागेन्द्र, पद्मश्री डॉ भारत भूषण, डॉ चिन्मय पण्ड्या एवं अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया।

इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि युगऋषि पं श्रीराम शर्मा जी कहते रहे हैं कि समस्त समाज मिलकर रहें, सभी एक दूसरे के सकारात्मक कार्यों में सहयोग करें। शांतिकुंज के रचनात्मक प्रकल्पों से सभी लाभान्वित हों। स्वामी योग अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि समाजोत्थान सहित योग के क्षेत्र में चलाये जा रहे अभियानों में शांतिकुंज, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय सदैव प्रमुख भूमिका निभायेगा।

उद्घाटन सत्र में वर्चुअल माध्यम से जुड़े आर्ट ऑफ लिविंग फाउण्डेशन के अध्यक्ष श्री श्री रविशंकर जी ने कहा कि योग अपने कर्म की कौशलता को निखारता है। सतोगुणी कर्म को बढ़ाता है। ज्ञान, कर्म और भक्ति के संगम का नाम है योग। उन्होंने कहा कि भारतीयता को विश्व मानवता के साथ सामंजस्य रखने का नाम योग है। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि वर्तमान समय में हमें सनातन योग की आवश्यकता है, जो सभी को जोड़ें, दरारों को भरे और दिलों को जोड़ों। जो नफरत, जात पात, छुआछूत, ऊँच-नीच की सारी दीवारों को हटायें, क्योंकि योग तो जोड़ने का कार्य करता है। आज विश्व को एकात्म योग की जरुरत है।

मोक्षायतन, अंतर्राष्ट्रीय योगाश्रम के संस्थापक पद्मश्री स्वामी भारत भूषण जी ने कहा कि योग हमें मरीचिका से बाहर निकलने का राह दिखाता है। सभी योग साधकों को ज्योति से ज्योति जलाकर संपूर्ण मानवता के लिए कार्य करना चाहिए। स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के कुलपति पद्मश्री डॉ एच.आर. नागेन्द्र ने कहा कि योग ही मन को शांत रखता है। उन्होंने योग के प्रचार में जुटे योग साधकों की मेहनत की सराहना की। देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या जी ने कहा कि योग अस्मिता के जागरण का विषय का है। योग साधना में मानव को महामानव बनाने की क्षमता विद्यमान है। योग संस्थान मुम्बई के निदेशक मॉ हंसा योगेन्द्र आदि ने भी अपने विचार रखें।

इससे पूर्व देसंविवि के कुलगीत व शांतिकुंज के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत प्रेरणाप्रद गीतों में उपस्थित जन समुदाय ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर धन्वन्तरि पत्रिका सहित विभिन्न पत्रिकाओं का विमोचन किया। देसंविवि के कुलपति श्री पारधी एवं प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने सभी अतिथियों का गायत्री मंत्र चादर, युगसाहित्य, प्रतीक चिह्न आदि भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मोरारजी देसाई नेशनल इन्स्टीट्यूट आफ योगा के निदेशक डॉ ईश्वर बसवारेड्डी, कैवल्यधाम योग इंस्टीट्यूट लूनावाडा के निदेशक डॉ सुबोध तिवारी, देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी जी, भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा कई देशों के योग विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षु आदि उपस्थित रहे।

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