उत्तराखंड की पहचान है ऐपन कला :-प्रोफेसर सुनील बत्रा


 उत्तराखण्ड के त्यौहारों तथा मांगलिक अवसरों पर बनाये जाते हैं  ऐपण कला कृति : प्रो. बत्रा

उत्तराखण्ड की आयपान आर्ट’ प्रतियोगिता का महाविद्यालय में आयोजन

हरिद्वार 06 अक्टूबर, 2023  एस.एम.जे.एन. पी.जी. काॅलेज में आज आन्तरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, पर्यावरण प्रकोष्ठ व अर्थशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वाधान में मिट्टी के गोल गमलों पर ‘उत्तराखण्ड की आयपान आर्ट’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में उत्तराखण्ड की लोककला, संस्कृति से सम्बन्धित डिजाईन बनाये जाये। प्रतियोगिता में रेशमा नेगी व गौरव बंसल ने संयुक्त रूप से प्रथम, शालिनी ने द्वितीय व पूजा गौड़ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।  

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बत्रा ने सभी प्रतिभागियों व विजयी खिलाड़ियों को अपनी शुभकामनायें प्रेषित करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड जोकि अपनी विशिष्ट संस्कृति एवं कलाकृतियों हेतु विश्वभर में प्रसिद्ध है इन्हीं संस्कृतियों में ऐपण भी एक प्रमुख कला है। प्रो. बत्रा ने बताया कि उत्तराखण्ड के विभिन्न त्यौहारों तथा मांगलिक अवसरों पर बनाये जाने वाले ऐपण का विशिष्ट स्वरूप एवं विधान होता है।  

आन्तरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ के समन्वयक डाॅ. संजय कुमार माहेश्वरी ने कहा कि ऐपण उत्तराखण्ड राज्य की प्राचीन परम्परा से जुड़ा हुआ अभिन्न अंग हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हम अपने त्यौहार, मंगल कार्य अपने रीति-रिवाजों के अनुसार मनायेंगे, तो ही हम अपनी लोककला ऐपण से भी जुड़े रहेंगे। डाॅ. माहेश्वरी ने कार्यक्रम संयोजक अर्थशास्त्र विभाग की श्रीमती रूचिता सक्सेना, कु. भव्या भगत व साक्षी गुप्ता का प्रतियोगिता सकुशल सम्पन्न कराने हेतु धन्यवाद प्रेषित किया। 

कार्यक्रम संयोजक अर्थशास्त्र विभाग की श्रीमती रूचिता सक्सेना ने अपने सम्बोधन में कहा कि उत्तराखण्ड की स्थानीय चित्रकला की शैली को ऐपण के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि ऐपण अनेक प्रकार के कलात्मक डिजाइनों में बनाया जाता है, अगुलियों और हथेलियों का प्रयोग करके अतीत की घटनाओं, शैलियों, अपने भाव-विचारों और सौन्दर्य मूल्यों पर विचार कर, इन्हें संरक्षित किया जाता है, जिसे देख मन, मस्तिष्क में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है और सकारात्मक शक्तियों के आह्वान का आभास होता है। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों द्वारा ऐपण कला से सजाये गये मिट्टी के बर्तनों में पौधा लगाकर कल होने वाली ‘जैव विविधता संरक्षण’’ विषय राष्ट्रीय सेमिनार में आने वाले अतिथियों को उपहार स्वरूप प्रदान किया जायेगा।  

प्रतियोगिता में प्रीति, स्नेहा सिंघल, मानसी, दिया, अंशिका, शालिनी, प्रिया, ममता, अपराजिता, भावना, सीमा आदि ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों छात्र-छात्राओं द्वारा ऐपण के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि ऐपण उत्तराखण्ड की एक पौराणिक कला है जिसके माध्यम से देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है। 

प्रतियोगिता में में निर्णायक मण्डल की अहम भूमिका का निवर्हन श्रीमती रिचा मिनोचा, डाॅ. सुगन्धा वर्मा तथा डाॅ. अमिता मल्होत्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो. जे.सी. आर्य, डाॅ. मोना शर्मा, डाॅ. आशा शर्मा, डाॅ. सरोज शर्मा, डाॅ. रजनी सिघंल, डाॅ. मिनाक्षी शर्मा, कु. वन्दना सिंह, कार्यालय अधीक्षक मोहन चन्द्र पाण्डेय आदि ने सभी प्रतिभागियों एवं विजयी छात्र-छात्राओं को अपनी शुभकामनायें प्रेषित की।


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