कहानी सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शत-शत नमन

 प्रेमचंद जी के बारे में कुछ जाने-अनजाने तथ्य–


* प्रेमचंद को प्रेमचंद नाम ज़माना प्रेस के संपादक और उर्दू के लेखक मुंशी दया नारायण निगम ने दिया।

* प्रेमचंद को 'उपन्यास सम्राट' प्रसिद्ध बंगाली कथाकार शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय ने, 'कलम का सिपाही' उनके ही बेटे अमृतराय ने और 'कलम का मज़दूर' मदन गोपाल ने कहा।

* प्रेमचंद का हिन्दी में मूल रूप से लिखा गया पहला उपन्यास 'कायाकल्प' (1926) है। इससे पहले के उनके सभी उपन्यास मूल रूप से उर्दू में लिखे गये थे और बाद में स्वयं उन्होंने उनका हिन्दी अनुवाद किया। जिनमें ग़बन, सेवासदन और रंगभूमि जैसे उपन्यास भी शामिल हैं।

* 'मंगलसूत्र' प्रेमचंद का लिखा अधूरा उपन्यास है। इसे रचने के दरमियान ही इनकी मृत्यु हो गयी थी। 1948 ई. में प्रेमचंद के पुत्र और विख्यात कथाकार अमृतराय ने इसे पूरा किया।

* प्रेमचंद की पहली कहानी 'इश्क़-ए-दुनिया और हुब्बे वतन' 1908 ई. में 'ज़माना पत्रिका' में प्रकाशित हुई। यह उर्दू में थी।

* प्रेमचंद का पहला कहानी संग्रह 'सोज़-ए-वतन' 1908 ई. में ज़माना प्रेस, कानपुर से प्रकाशित हुआ। इसमें इनकी उर्दू में लिखी कहानियाँ थीं। उर्दू में वे नवाबराय नाम से लिखते थे।

* 'सोज़-ए-वतन' पर अंग्रेज़ सरकार ने सिडिशन का आरोप लगाकर इसे ज़ब्त कर लिया। और इसकी 700 प्रतियाँ जला दी गयीं।

* सिडिशन के आरोप के बाद वे नवाबराय नाम से नहीं लिख सकते थे इसलिए उन्होंने अपना नया नामकरण 'प्रेमचंद' के रूप में किया।

* ऐसा माना जाता है कि प्रेमचंद के आगे मुंशी दरअस्ल मुंशी दया नारायण निगम का है। इन दोनों ने मिलकर एक पत्रिका संपादित की थी, इसके संपादक में इन दोनों का नाम मिलाकर 'मुंशी- प्रेमचंद' दिया जाता था। बाद में वे इसी नाम से लोकप्रिय हो गये।

* प्रेमचंद नाम से उनकी पहली कहानी 'बड़े घर की बेटी' है। लेकिन यह भी मूल उर्दू की कहानी रही है।

* प्रेमचंद की पहली हिन्दी भाषा और देवनागरी लिपि में लिखी कहानी 'सौत' (1915 ई.) है, यह महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के संपादन में आने वाली प्रसिद्ध पत्रिका 'सरस्वती' में प्रकाशित हुई थी।

* प्रेमचंद का पहला हिन्दी कहानी संग्रह 'सप्त सरोज' (1917 ई०) में प्रकाशित हुआ।

* प्रेमचंद की अंतिम कहानी 'कफ़न' (1936 ई०) तथा अंतिम उपन्यास 'गोदान' (1936 ई०) है।

* प्रेमचंद के उपन्यास 'रंगभूमि' को 'भारतीय जनजीवन का रंगमंच', 'प्रेमाश्रम' को 'हिन्दी का पहला राजनीतिक उपन्यास' तथा 'गोदान' को 'भारतीय किसान जीवन की महागाथा' कहा जाता है।


(संकलन: के० पी० अनमोल, सन्दर्भ: विभिन्न शोध पुस्तकों से )


हिन्दी के इस महान कथाकार को नमन।


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