गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के तत्वाधान में केदारनाथ धाम में आयोजित हुआ "योगोत्सव"

 हरिद्वार 10 मई (आकांक्षा वर्मा संवाददाता गोविंद कृपा हरिद्वार)  आध्यात्मिक  जाग्रति के लिए योग”  विषय को लेकर योग विज्ञान विभाग, गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय हरिद्वार द्वारा उत्तराखण्ड के चार पवित्र धामों में से एक श्री केदारनाथ धाम में




“योगोत्सव”  हुआ संपन्न। एक दिवसीय “योगोत्सव”  का  आयोजन आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली के माध्यम से आयोजित हुआ था।  आयुष मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा  सम्पूर्ण विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, 2022 को हर्षौल्लास पूर्वक मनाया जायेगा जिसके लिए पूर्व तैयारी हेतु 100 दिन पूर्व से विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों पर काउंट डाउन प्रोग्राम “योगोत्सव” का आयोजन “100 संस्थानों के द्वारा 100 एतिहासिक स्थानों पर 100 कार्यक्रम” किये जा रहे हैं । उसी क्रम में गुरुकुल कांगड़ी (सम विश्वविद्यालय), हरिद्वार के योग विज्ञान विभाग द्वारा उत्तराखण्ड के चार पवित्र धामों में से एक श्री केदारनाथ धाम में “योगोत्सव”  आयोजित किया गया।


इस अवसर पर मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डॉ. ईश्वर वी. बसवारड्डी ने कहा कि केदारनाथ धाम गुरुकुल योगोत्सव  का आयोजन होना एक एतिहासिक घटना है। श्री केदार नाथ क्षेत्र जो योगाभ्यास के लिए उपयुक्त भूमि है। यहाँ से फैला योग सन्देश सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित अवश्य करेगा। उन्होंने कहा कि योग की अवस्था प्राप्त करने के लिए कायिक, कर्म और मानस की शुद्धि होनी आवश्यक है। षट्कर्म, यम-नियम ध्यान आदि के निरंतर अभ्यास से यह शुद्धि हो जाती है। शुद्धि होते रहने पर ही हमें योग की विभिन्न अवस्थाओं का ज्ञान होने लगता है।


इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूपप्रोफेसर ईश्वर भारद्वाज ने “योग परम्परा में हिमालय के योगियों का योगदान” विषय पर वक्तव्य देते हुए कहा कि योग परम्परा हिमालय की गुफाओं, कंदराओं में योगियों ने योग की परम्परा को समृद्ध किया है। योगाभ्यासी किसी भी देश अथवा प्रदेश का हो हिमालय की गोद में ही अध्यात्मिक अनुभूति होती है जो अध्यात्मिक जाग्रति में परिवर्तित हो जाती है।


योग विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरेन्द्र कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत केदार स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया तथा योगोत्सव के इस आयोजन में सामान्य योग अभ्यास क्रम का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि इस प्रोटोकॉल के नियमित निरंतर अभ्यास से मनुष्य पूर्ण रूप से स्वस्थ्य रहा सकता है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल की परम्परा में प्राचीन योग साहित्य के आधार पर ही योग शिक्षण प्रदान किया जाता है।


कार्यक्रम के संयोजक डॉ ऊधम सिंह ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम में योगोत्सव का आयोजन इससे पहले इ कभी नहीं हुआ है। उन्होंने समस्त प्रतिभागियों को विशेष ध्यान का अभ्यास कराया जिससे यहाँ की आध्यात्मिक ऊर्जा को आत्मसात किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस योगोत्सव में वैदिक यज्ञ, सामान्य योग अभ्यास क्रम, अध्यात्मिक जाग्रति के लिए विशेष ध्यान का अभ्यास तथा “योग परम्परा में हिमालय के योगियों का योगदान” को विषय को लेकर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए लगभग 60 विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का एक दल गुरुकुल से श्री केदारनाथ धाम पहुंचा था  इस कार्यक्रम में मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली के 9 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया था।


डॉ. ऊधम सिंह ने बताया की इस कार्यक्रम में बद्री केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री अजेन्द्र अजय जी का विशेष सहयोग रहा है। इस अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति प्रोफेसर रूपकिशोर शास्त्री जी ने कि गुरुकुल हमेशा अदम्य साहस का परिचय देता है इस श्रृंखला में यह कार्यक्रम इस संस्था की  गरिमा में वृद्धि करेगा। समविश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. सुनील कुमार ने आयोजन से जुड़े सभी शिक्षकों, कर्मचारियों को शुभकामनाये प्रदान की।


इस अवसर पर संजय कुमार,  मोहन, जतिंदर मोहन, जोगेंद्र, राहुल आदि उपस्थित रहे।

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