वासुदेव लाल मैथिल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में हुआ सरस्वती पूजन

 !!विद्यारंभ संस्कार,सरस्वती पूजन का आयोजन!!


रुड़की 5 फरवरी (अनिल लोहानी वरिष्ठ संवाददाता गोविंद कृपा



रुडकी )वासुदेव लाल मैथिल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज ब्रह्मपुर रुड़की,हरिद्वार में शिक्षा उपनयन संस्कार,सरस्वती पूजन का हुआ भव्य आयोजन जिसमें वक्ताओं ने मां वागेश्वरी जयन्ती एवं बसंत आगमन पर मानव जीवन क्रम के सोलह संस्कारों में शिक्षा उपनयन संस्कार पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ रुड़की में स्थित इण्डियन बैंक के प्रबंधक श्री अजय कुमार टम्टा एवं श्री विपिन पाण्डेय,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला व्यवस्था प्रमुख एवं विद्यालय के सम्मानित कोषाध्यक्ष श्री नवीन गुप्ता एवं विद्यालय कार्य कारिणी के वरिष्ठ सदस्य भाजपा प्रान्तीय कार्यकारिणी सदस्य श्री अजय सैनी जी ने मां शारदा के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्जवलित करते हुए संयुक्त रुप से उद्घाटन किया। 

कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला व्यवस्था प्रमुख श्रीमान नवीन गुप्ता जी ने कहां कि आज का दिन ऋतु परिवर्तन के साथ प्रकृति में प्राकृतिक सौन्दर्यता के साथ मानव जीवन क्रम के सोलह संस्कारों में मुख्य शिक्षा उपनयन संस्कार(विद्यारंभ संस्कार) के लिए शुभ माना जाता है।आज के ही दिन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी द्वारा सृजित देवी सरस्वती का अवतरण इस प्रकृति में हुआ जिसने हमें स्वर ज्ञान दिया।हम सबको मालूम होगा कि सृष्टि की उत्पत्ति से ही इस प्राणी जगत को संवारने में देवी स्वरूप मां वागेश्वरी का विशेष योगदान रहा है। अगर हम बच्चे के जन्म से उसका अच्छा लालन-पालन भली प्रकार से करेंगे तो वहीं बच्चे हमारे देश,धर्म और संस्कृति के रक्षक बनेंगे। बच्चों के व्यक्तित्व विकास में ही भारतीय संस्कृति एवम् सभ्यता निहित है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से चलने वाले विद्या भारती द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर एवं विद्या मंदिर सम्पूर्ण देशभर में इसी उद्देश्य को लेकर पिछले 1952 से शिक्षा के क्षेत्र में सतत् प्रयत्नशील हैं।

उपस्थित जन समुदाय को सम्बोधित करते हुए श्री नवीन गुप्ता जी ने कहां कि बाल्यकाल से ही अगर देखा जाए तो मां अपनी ममता से शिशु के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती है।परिवार में बच्चों का सर्वाधिक रुझान मां के प्रति ही रहता है। इसलिए बच्चों के प्रति मां की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि सच्चे मायने में मां शिशु की एक ऐसी शिल्पकार है,जिसमें शिशु का विकास काफी हद तक निहित है।

विद्यालय की आचार्य बहिन आज के कार्यक्रम की प्रमुख श्रीमती सुनीता सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित जनशक्ति को सम्बोधित करते हुए कहां कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी द्वारा इस सृष्टि में आदिशक्ति मां बागेश्वरी की उत्पत्ति कर सम्पूर्ण प्राणी जगत की जिह्वा को संगीत,काव्य,कला,रस,छंद,वाणी एवं वीणा प्रदान की‌। दूसरी ओर विद्यालयी शिक्षा में माघ शुक्ल पंचमी अंक ज्ञान,अक्षर ज्ञान के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।सतयुग,त्रेता,द्वापरयुग की जाए तो गुरु कुल में राम,कृष्ण,कौरव,पाण्डवों की शिक्षा-दीक्षा का प्रारंभ भी बसंत पंचमी के ही दिन से हुई थी।दूसरा धर्म रक्षा हेतु अमर बलिदानी वीर हकीकत राय का बलिदान हमारी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा दायक है।

श्री कमल किशोर डुकलान प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर इकाई के संयोजक में चले कार्यक्रम में भाजपा प्रान्तीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीअजय सैनी ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम को वाद्ययंत्रों के साथ संगीतमय बनाने में ढढेरी निवासी एवं विश्व हिन्दू परिषद के प्रखण्ड प्रमुख श्री अभिनव प्रजापति के नेतृत्व में आमन्त्रित संगीत मण्डली का कार्यक्रम में विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में अभिभावक गण,आचार्य परिवार एवं काफी संख्या में भैया-बहिन उपस्थित थे।

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