श्री शंकर करौली महादेव धाम का दीक्षा महोत्सव हुआ संपन्न

 संयम-साधना से ही होती है आत्मबल की प्राप्ति : करौली शंकर महादेव

श्री करौली शंकर महादेव धाम में त्रिदिवसीय महा सम्मेलन, ध्यान साधना शिविर एवं दीक्षा समारोह का हुआ समापन

देश-विदेश से आये 3150 साधकों को हवन, साधना के उपरान्त दी गयी मंत्र दीक्षा

हरिद्वार, 31 अक्टूबर ( अमर शदाणी  संवाददाता गोविंद कृपा हरिद्वार ) उ



त्तर भारत की प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री करौली शंकर महादेव धाम, भारत माता पुरम, भूपतवाला, हरिद्वार में आयोजित त्रिदिवसीय महा सम्मेलन, ध्यान साधना शिविर एवं दीक्षा समारोह में देश-विदेश से आये 3150 साधकों को हवन, साधना के उपरान्त मंत्र दीक्षा दी गयी। समूचे विश्व भर से लगभग सवा लाख लोग इस आयोजन से ऑनलाईन जुड़े। 

महासम्मेलन के समापन के अवसर पर संस्था के परमाध्यक्ष करौली शंकर महादेव जी महाराज ने कहा कि संयम-साधना से ही आत्मबल की प्राप्ति होती है। मनुष्य अपनी शक्तियों को जाग्रत कर रोग, शोक व व्याधियों से मुक्ति पाता है। इस आयोजन के माध्यम से हजारों साधकों ने ध्यान, साधना व मंत्र दीक्षा के माध्यम से स्वयं को परिष्कृत करते हुए आत्मबल को जाग्रत करने का कार्य किया है।  

करौली शंकर महादेव जी महाराज ने कहा कि इस महासम्मेलन में हजारों साधकों को मंत्र दीक्षा दी गयी है वहीं चुनिंदा गृहस्थजन तंत्र दीक्षा के पात्र होंगे, उन्हें ही तंत्र दीक्षा का मंत्र जप के लिए प्रदान किया जायेगा। कलियगु में पहली बार गृहस्थों के लिए इतनी सरल तंत्र साधना का मार्ग खोला गया है जिसका श्रेय परम पूज्य गुरूदेव पंडित श्री राधा रमन जी मिश्र को जाता है, जिन्हांेने गुरू के रूप में मुझे मानव कल्याण के लिए इस पथ पर अग्रसर किया। उन्होंने कहा कि तंत्र दीक्षा के लिए अद्भुत व गोपनीय रूप से चयन होता है। तंत्र दीक्षा के लिए पहले मंत्र दीक्षा प्राप्त कर चुके भक्तों में से तंत्र दीक्षा के लिए कुछ लोगों को चुना जाता है। करौली शंकर महादेव जी महाराज कि वह भक्त ही तंत्र दीक्षा का पात्र होता है जो परीक्षा को उत्तीर्ण करता है।

महासम्मेलन में देश विदेश से आये हजारों साधकों ने तीन दिन तक ध्यान, साधना, हवन के उपरान्त मंत्र दीक्षा प्राप्त की। महासम्मेलन को सफल बनाने में मुख्य रूप से डॉ. उमेश सचान, अनिरूद्ध शर्मा, आशु, राहुल भामरा, दिग्गज राजपूत ने अपना योगदान प्रदान किया।

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