वासुदेव लाल मैथिली सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज रुड़की में प्रवेश उत्सव का आयोजन

 !!विद्यालय में प्रवेशोत्सव का आयोजन!!


विद्यालय में  आयोजित कोई भी उत्सव छात्रों में सृजनशील ऊर्जा निर्माण के साधन का एक नाम है और जब इसमें बच्चों का प्रवेश शब्द जुड़ जाता है तो इसमें एक अलग प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है।...


रुड़की 16 मई (कमल किशोर डुकलान  ) वासुदेव लाल मैथिल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज ब्रह्मपुर रुड़की हरिद्वार की ओर से "पढ़ेगा लिखेगा जब इन्सान होगा तब यह राष्ट्र महान" की थीम पर प्रवेशोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रवेशोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यसभा सांसद श्रीमान नरेश बंसल,रुड़की क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्रीमान प्रदीप बत्रा एवं पूर्व वैज्ञानिक माननीय विभाग संघचालक श्रीमान रामेश्वर कुलश्रेष्ठ जी ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम में विद्यालयी छात्रों एवं उपस्थित जन समूह को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल जी ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में कोई भी उत्सव छात्रों में सृजनशील ऊर्जा निर्माण के साधन का एक नाम है और जब इसमें बच्चों का प्रवेश शब्द जुड़ जाता है तो इसमें एक अलग प्रकार का आनंद की अनुमति होती है। वासुदेव लाल मैथिल सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर इंटर कालेज ब्रह्मपुर रुड़की हरिद्वार ने "पढ़ेगा लिखेगा जब इन्सान,होगा तब यह राष्ट्र महान" की थीम पर प्रवेशोत्सव का आयोजन किया है।प्रवेशोत्सव का शाब्दिक अर्थ होता है- प्रवेश का उत्सव यानि विद्यालय में आए नए बच्चों के स्वागत में आनन्दोत्सव के रूप में देखना तथा धूमधाम से मनाना। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु विद्यालय परिवार की ओर से आज छात्रों द्वारा मंचित आनन्दमूलक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है जो कि नये अथवा पूराने सभी भैया बहिनों में नये उत्साह एवं प्रेरणा देने का काम करते हैं इसके लिए विद्यालय प्रबंध समिति एवं विद्यालय के आचार्य परिवार बधाई के पात्र हैं।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं रूड़की क्षेत्र के तीन बार के लोकप्रिय विधायक श्रीमान प्रदीप बत्रा जी ने कहा कि अगर देखा जाए तो बच्चे जब विद्यालय में प्रवेश लेते हैं तो उसकी रौनक उसी तरह बढ़ जाती है जिस तरह फूलों के पौधों में नये- नये फूल आने से होता है। बच्चे तो विद्यालय रूपी आँगन के मनहर,पावन प्रसून हैं जो अपने आँगन को सदैव सुगंधित करते रहते हैं। निश्चित रूप में वर्तमान सत्र में प्रवेशित बच्चे अपने निर्मल पावन किलकारी से वासुदेव लाल मैथिल सरस्वती विद्या मंदिर रुपी विद्या एवं ज्ञान के आलय को जगमग करेंगे। अब तो शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत सरस्वती शिशु मन्दिरों में भी निशुल्क शिक्षा के तहत प्रवेश मिल रहा है। वे सभी बच्चे इन विद्यालयों से आठवीं तक की शिक्षा निशुल्क प्राप्त कर रहे हैं। शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेशित बच्चों का सम्पूर्ण शुल्क एवं प्रतिपूर्ति व्यय सरकार वहन करती है। विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम बहुत ही सुन्दर एवं प्रशंसनीय है इसके लिए विद्यालय परिवार बधाई का पात्र है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व वैज्ञानिक एवं मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय विभाग संघचालक श्रीमान रामेश्वर कुलश्रेष्ठ ने कहा कि विद्यालय एक ऐसा स्थल है जहाँ बच्चों को पढ़ाने वाले आचार्यों बच्चे के सर्वांगीण विकास में सम्यक् शिक्षा मिलती है। जिस प्रकार एक मूर्तिकार मूर्ति को ठीक प्रकार से तराशकर उसे एक मूर्ति का रुप देता है उसी प्रकार एक शिक्षक भी बच्चों को ठीक प्रकार से तराशकर,उनके अन्तर्मन के भाव को अच्छी तरह समझकर, परखकर उन्हें सार्थक व जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान कर जीवंत दिशा प्रदान करते हैं। भारत के महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने बच्चों की शिक्षा को दृष्टिगत रखते हुए कहा था- विद्यालय में बच्चों का समय पर प्रवेश हो जाए तथा सबसे बढ़कर उन्हें ऐसी शिक्षा मिले जिससे वह स्वयं की पहचान करते हुए अपने देश और समाज  को पहचानकर सही दिशा में अग्रसर हो सके। विद्यालय द्वारा आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के द्वारा आचार्यों द्वारा दी जा रही शिक्षा छात्रों का ठीक प्रकार से सर्वांगीण विकास हो सके उनके ज्ञान को सही ज्ञान के निवेश में लगाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में विद्यालय के भैया बहिनों ने प्रवेशोत्सव के अवसर पर अनेक प्रकार के प्रेरक मंचित क्रिया आधारित गतिविधि कार्यक्रमों का आयोजन। कार्यक्रम में प्रदीप सचदेव व्यवस्थापक,श्री सुरेश चंद जैन अध्यक्ष,श्री नवीन गुप्ता कोषाध्यक्ष आदि ने विचार व्यक्त किए। श्री अनुज त्यागी विभाग कार्यवाह,श्री नरेन्द्र जी जिला प्रचारक, रमेश जी सह जिला कार्यवाह, श्री मनोज सैनी,श्री अनिल माहेश्वरी,आकाश माहेश्वरी,पवन सैनी एवं विद्यालय प्रधानाचार्य एवं आचार्यों के अलावा बड़ी संख्या में अभिभावक एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। 





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